प्यार रोज़मर्रा में खो ही जाता है
एक याद रह जाती है , रंगीनियों की
खूब सूरत पल चला ही जाता है
खेंचेतें है हम बहुत अपने आप को
खुद से अपना दामन छूट ही जाता है
‘होनी ’ से यारी अक्लमंद ज़िन्दगी है
जो होना है वो आखिर हो ही जाता है
रोज़े अज़ल से तै है मंजिल , खेंचेती है
जिस राह का जो है , उस पर आ ही जाता है
न भूलें है किसी को यूँ भूल कर भी
रह रह कर ख़याल उनका आ ही जाता है
अज़ल .