2008 मुबारक हो
साल में क्या नया है
वक़्त मुझे पुरानी सादगी से देखे है
जब देखूं इस जहाँ के चलन को , अफ़सोस
किसी को भी ये, कब नयी निगाह से देखे है ?
नए साल की बधांइयां लीजिये , यूं
मौका है आज फिर शाम रंगीन करेंगे और
आज पागल पन पे अक्ल वाले फिकरे कम कसेंगे
अज़ल
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